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आज का पंचांग गुवाहाटी

किसी भी शहर और तारीख के लिए तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल और शुभ समय। अभी गणना किया हुआ, किताब से कॉपी नहीं।

सारे समय गुवाहाटी के स्थानीय समय (Asia/Kolkata) में हैं।

गुवाहाटी

5 नवंबर 2026, गुरुवार

एकादशी · कृष्ण पक्ष · आश्विन

सूर्योदय5:34 AM
सूर्यास्त4:38 PM
चंद्रोदय2:39 AM, 6 नव
चंद्रास्त2:06 PM

पंचांग (पाँच अंग)

तिथिकृष्ण एकादशी तक 10:36 AMफिर कृष्ण द्वादशी तक 10:31 AM, 6 नव
वारगुरुवार
नक्षत्रउत्तर फाल्गुनी तक 3:56 AM, 6 नवफिर हस्त तक 4:43 AM, 7 नवपद 1
योगइन्द्र तक 6:26 AMफिर वैधृति तक 5:09 AM, 6 नवफिर विष्कुम्भ तक 4:10 AM, 7 नव
करणबालव तक 10:36 AMफिर कौलव तक 10:30 PMफिर तैतिल तक 10:31 AM, 6 नव
पक्षकृष्ण पक्ष

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)आश्विन
मास (पूर्णिमांत)कार्तिक
विक्रम संवत2083
शक संवत1948
ऋतुशरद
अयनदक्षिणायन
चंद्र राशिसिंह तक 9:34 AMफिर कन्या तक 5:15 PM, 7 नव
सूर्य राशितुला

अशुभ समय

राहुकाल12:29 PM – 1:52 PM
यमगंड5:34 AM – 6:57 AM
गुलिक काल8:20 AM – 9:43 AM
वर्ज्यम10:49 AM – 12:27 PM
भद्रा (विष्टि करण)आज नहीं

शुभ समय

अभिजीत मुहूर्त10:44 AM – 11:28 AM
ब्रह्म मुहूर्त3:50 AM – 4:42 AM
अमृत काल8:36 PM – 10:14 PM
सर्वार्थ सिद्धि योगआज नहीं

दिन का चौघड़िया

  • शुभ

    5:34 AM – 6:57 AM

    शुभ
  • रोग

    6:57 AM – 8:20 AM

    बचें
  • उद्वेग

    8:20 AM – 9:43 AM

    बचें
  • चर

    9:43 AM – 11:06 AM

    सामान्य
  • लाभ

    11:06 AM – 12:29 PM

    शुभ
  • अमृत

    12:29 PM – 1:52 PM· राहुकाल

    सर्वश्रेष्ठ
  • काल

    1:52 PM – 3:15 PM

    बचें
  • शुभ

    3:15 PM – 4:38 PM

    शुभ

रात का चौघड़िया

  • अमृत

    4:38 PM – 6:15 PM

    सर्वश्रेष्ठ
  • चर

    6:15 PM – 7:52 PM

    सामान्य
  • रोग

    7:52 PM – 9:29 PM

    बचें
  • काल

    9:29 PM – 11:06 PM

    बचें
  • लाभ

    11:06 PM – 12:43 AM, 6 नव

    शुभ
  • उद्वेग

    12:43 AM, 6 नव – 2:20 AM, 6 नव

    बचें
  • शुभ

    2:20 AM, 6 नव – 3:57 AM, 6 नव

    शुभ
  • अमृत

    3:57 AM, 6 नव – 5:34 AM, 6 नव

    सर्वश्रेष्ठ

खगोल गणित से अभी गणना (दृक पद्धति, लाहिरी अयनांश)। छपे पंचांग से एक-दो मिनट का फर्क हो सकता है। अयनांश (लाहिरी): 24.2343°

आज का दिन आपके लिए कैसा है?

पंचांग आपके शहर में सबके लिए एक जैसा है, आपकी कुंडली नहीं। Mygrah के AI से पूछें कि आज के ग्रह आपकी अपनी कुंडली पर कैसा असर डाल रहे हैं।

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पंचांग क्या है?

पंचांग किसी एक जगह के लिए एक दिन का हिंदू कैलेंडर है। नाम पंच (पाँच) और अंग से बना है, क्योंकि हर दिन पाँच चीज़ों से बताया जाता है: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। शादी, पूजा, यात्रा, नई नौकरी या गाड़ी खरीदने की तारीख चुनने और व्रत के दिन जानने के लिए लोग सदियों से पंचांग देखते आए हैं।

ऊपर दिया पंचांग आपके चुने शहर और तारीख के लिए अभी-अभी गणना किया गया है। यह किसी छपी किताब से कॉपी नहीं है, इसलिए दुनिया के किसी भी शहर के लिए काम करता है और सारे समय उसी शहर के टाइम ज़ोन में दिखते हैं।

पाँच अंग, आसान भाषा में

1. तिथि

चंद्रमा हर दिन सूर्य से लगभग 12 अंश आगे बढ़ता है। हर 12 अंश एक तिथि है, इसलिए एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं। पहली 15 शुक्ल पक्ष की (अमावस्या के बाद से पूर्णिमा तक) और बाकी 15 कृष्ण पक्ष की (अमावस्या पर खत्म) होती हैं। तिथि किसी भी समय शुरू हो सकती है, आधी रात से इसका कोई लेना-देना नहीं, इसलिए पंचांग में हमेशा तिथि का समाप्ति समय लिखा होता है।

2. वार

वार यानी सप्ताह का दिन, लेकिन वैदिक गणना में दिन सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं। हर वार का एक स्वामी ग्रह है: रविवार सूर्य, सोमवार चंद्र, मंगलवार मंगल, और इसी तरह आगे। राहुकाल, चौघड़िया और होरा, तीनों वार पर ही निर्भर करते हैं।

3. नक्षत्र

आकाश को 13°20' के 27 हिस्सों में बाँटा गया है, यही 27 नक्षत्र हैं। चंद्रमा जिस नक्षत्र से गुज़र रहा हो, वही उस दिन का नक्षत्र है। मुहूर्त में सबसे ज़्यादा यही अंग देखा जाता है। जैसे रोहिणी, मृगशिरा, हस्त, अनुराधा और रेवती विवाह के लिए अच्छे माने जाते हैं।

4. योग

सूर्य और चंद्रमा के निरयन अंश जोड़कर 27 हिस्सों में बाँटें तो योग मिलता है। विष्कुम्भ से वैधृति तक कुल 27 योग हैं। ज़्यादातर ठीक होते हैं, पर व्यतीपात और वैधृति जैसे कुछ योगों में नया काम शुरू करने से बचा जाता है।

5. करण

हर तिथि के दो आधे हिस्से होते हैं, इन्हें करण कहते हैं। कुल 11 करण हैं: 7 पूरे महीने दोहराते रहते हैं (बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि) और 4 महीने में एक बार आते हैं। विष्टि को भद्रा भी कहते हैं और लोग सबसे ज़्यादा इसी को देखते हैं, क्योंकि भद्रा में शुभ काम आमतौर पर शुरू नहीं किया जाता।

इस पेज पर और क्या-क्या है

चीज़मतलब
सूर्योदय और सूर्यास्तपंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है। नीचे के सारे समय इन्हीं दो समयों से निकलते हैं।
राहुकालदिन का लगभग डेढ़ घंटा जिस पर राहु का असर माना जाता है। इसमें नया काम शुरू नहीं करते।
यमगंड और गुलिकइतने ही लंबे दो और समय। यमगंड से बचते हैं, गुलिक में शुभ काम नहीं करते।
अभिजीत मुहूर्तदोपहर के आसपास लगभग 48 मिनट, ज़्यादातर कामों के लिए बहुत अच्छा। कई परंपराओं में बुधवार को इसे नहीं लेते।
ब्रह्म मुहूर्तसूर्योदय से लगभग 96 से 48 मिनट पहले। ध्यान, पूजा और पढ़ाई का पारंपरिक समय।
अमृत काल और वर्ज्यमनक्षत्र से जुड़े छोटे समय। अमृत काल शुभ है, वर्ज्यम से बचते हैं।
हिंदू मास और संवतदोनों तरीकों से दिखाया गया है: अमांत (महीना अमावस्या पर खत्म, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण में) और पूर्णिमांत (महीना पूर्णिमा पर खत्म, उत्तर भारत में)।

हम गणना कैसे करते हैं

यहाँ सब कुछ खगोल गणित है, अंदाज़ा नहीं। हम उस मिनट के लिए सूर्य और चंद्रमा की असली स्थिति लेते हैं, लाहिरी अयनांश (जिसे भारत सरकार का राष्ट्रीय पंचांग भी मानता है) से निरयन राशिचक्र में बदलते हैं, और फिर हर अंग के बदलने का सही समय निकालते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त आपके शहर के अक्षांश-देशांतर पर सूर्य के ऊपरी किनारे से गिने जाते हैं, जो आज के ज़्यादातर दृक पंचांगों का तरीका है। इसलिए छपे पंचांग से एक-दो मिनट का फर्क हो सकता है, और अगर वह किसी दूसरे शहर का बना हो तो फर्क और ज़्यादा होगा।

आज का पंचांग कैसे इस्तेमाल करें

  • व्रत से पहले तिथि देखें। एकादशी, प्रदोष और पूर्णिमा के व्रत तिथि से चलते हैं, अंग्रेज़ी तारीख से नहीं।
  • कुछ नया शुरू करने से पहले राहुकाल और भद्रा देखें और उनके बाहर का समय चुनें। अभिजीत या अच्छा चौघड़िया अच्छा विकल्प है।
  • शादी या गृह प्रवेश जैसे बड़े काम के लिए मुहूर्त खोजक देखें, जो पूरे साल को सभी नियमों के साथ जाँचता है।
  • विदेश में रहते हैं तो शहर बदल लें। दिल्ली का पंचांग लंदन या न्यूयॉर्क के लिए सही नहीं है, सूर्योदय अलग होता है और कभी-कभी सूर्योदय की तिथि भी बदल जाती है।

जानना चाहते हैं कि आज का दिन खास आपके लिए कैसा है? पंचांग एक शहर में सबके लिए एक जैसा होता है, आपकी कुंडली नहीं। Mygrah के AI से अपनी कुंडली के बारे में पूछें, वह आज के ग्रह गोचर को आपकी जन्म कुंडली से मिलाकर बताएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आज कौन सी तिथि है?+

आज की तिथि ऊपर पंचांग में सबसे पहले दिखती है, आपके शहर में उसके खत्म होने के सही समय के साथ। अगर दिन में नई तिथि शुरू होती है तो वह नीचे लिखी होती है।

पंचांग का दिन सूर्योदय से क्यों शुरू होता है?+

वैदिक गणना में वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है। इसलिए 'दिन की' तिथि या नक्षत्र वही है जो सूर्योदय पर चल रहा हो। आधी रात के बाद का समय भी अगले सूर्योदय तक पिछली तारीख में गिना जाता है।

क्या यह पंचांग मेरे शहर के लिए सही है?+

हाँ। यह आपके चुने शहर के अक्षांश, देशांतर और टाइम ज़ोन के लिए, सूर्य-चंद्र की असली स्थिति और लाहिरी अयनांश से गणना होता है। छपे पंचांग से एक-दो मिनट का फर्क हो सकता है, क्योंकि वे समय को गोल कर देते हैं।

अमांत और पूर्णिमांत मास में क्या फर्क है?+

अमांत (गुजरात, महाराष्ट्र, दक्षिण भारत) में महीना अमावस्या पर खत्म होता है, पूर्णिमांत (उत्तर भारत) में पूर्णिमा पर। शुक्ल पक्ष का नाम दोनों में एक जैसा रहता है, कृष्ण पक्ष में एक महीने का फर्क होता है। हम दोनों दिखाते हैं।

आज किन समयों से बचना चाहिए?+

राहुकाल, यमगंड, गुलिक और वर्ज्यम, और शुभ काम के लिए भद्रा (विष्टि करण)। ये ऊपर लाल बॉक्स में लिखे हैं।

क्या दूसरी तारीख का पंचांग देख सकते हैं?+

हाँ। तारीख चुनें या पिछला/अगला दिन बटन दबाएँ। आप सीधे तारीख वाला पेज भी खोल सकते हैं, जैसे /hi/panchang/2026-11-04, और उसे शेयर कर सकते हैं।

रीडिंग केवल मार्गदर्शन और मनोरंजन के लिए हैं। ये चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं हैं।