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आज का राहुकाल देहरादून

आपके शहर के आज के सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाला गया राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल का सही समय।

सारे समय देहरादून के स्थानीय समय (Asia/Kolkata) में हैं।

देहरादून

5 नवंबर 2026, गुरुवार

एकादशी · कृष्ण पक्ष · आश्विन

सूर्योदय6:35 AM
सूर्यास्त5:27 PM
चंद्रोदय3:38 AM, 6 नव
चंद्रास्त3:01 PM

राहुकाल

बचें

1:22 PM – 2:44 PM

अवधि: 82 मिनट

यमगंड

बचें

6:35 AM – 7:56 AM

अवधि: 82 मिनट

गुलिक काल

बचें

9:18 AM – 10:39 AM

अवधि: 82 मिनट

अभिजीत मुहूर्त

शुभ

11:39 AM – 12:23 PM

अवधि: 43 मिनट

राहुकाल से अलग

आज का दिन आपके लिए कैसा है?

पंचांग आपके शहर में सबके लिए एक जैसा है, आपकी कुंडली नहीं। Mygrah के AI से पूछें कि आज के ग्रह आपकी अपनी कुंडली पर कैसा असर डाल रहे हैं।

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राहुकाल क्या है?

राहुकाल हर दिन का लगभग डेढ़ घंटे का समय है जो राहु से जुड़ा माना जाता है। वैदिक ज्योतिष में राहु छाया ग्रह है जो भ्रम और देरी लाता है, इसलिए नियम सीधा है: राहुकाल में कोई ज़रूरी काम शुरू न करें। जो काम पहले से चल रहा है वह ठीक है, बस शुरुआत इस समय से बाहर रखी जाती है।

दक्षिण भारत में यह मान्यता बहुत मज़बूत है, वहाँ हर कैलेंडर और मंदिर के बोर्ड पर राहुकालम लिखा रहता है। उत्तर भारत में लोग इसे ज़्यादातर यात्रा, कागज़ों पर दस्तखत, पूजा या कोई बड़ी खरीदारी से पहले देखते हैं।

राहुकाल की गणना कैसे होती है

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 बराबर हिस्सों में बाँटिए। इनमें से एक हिस्सा राहुकाल है, और कौन सा, यह वार पर निर्भर करता है:

वारराहुकाल भागयमगंड भागगुलिक भाग
रविवार8वाँ5वाँ7वाँ
सोमवार2रा4था6ठा
मंगलवार7वाँ3रा5वाँ
बुधवार5वाँ2रा4था
गुरुवार6ठा1ला3रा
शुक्रवार4था7वाँ2रा
शनिवार3रा6ठा1ला

मान लीजिए सोमवार को सूर्योदय 6:00 और सूर्यास्त 18:00 है, तो हर भाग 90 मिनट का होगा और राहुकाल दूसरा भाग, यानी 7:30 से 9:00 होगा। सर्दियों में दिन छोटा होता है तो यह समय भी छोटा हो जाता है, गर्मियों में लंबा। इसीलिए "हर सोमवार 7:30 से 9:00" वाला चार्ट सिर्फ़ विषुव के आसपास के दिनों में सही बैठता है। इस पेज पर समय आपके शहर के असली सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाला जाता है।

यमगंड और गुलिक काल

इसी 8 भाग वाले बँटवारे से दो और समय मिलते हैं। यमगंड पर यम का असर माना जाता है और इसे भी राहुकाल की तरह नए काम के लिए टाला जाता है। गुलिक (शनि का पुत्र) थोड़ा अलग है। कई लोग इसमें शुभ काम नहीं करते, पर कुछ परंपराओं में माना जाता है कि गुलिक में शुरू किया काम दोहराता है, इसलिए इसमें अंतिम संस्कार या कर्ज़ लेने से बचते हैं, और कुछ लोग इसमें ज़मीन खरीदना या कर्ज़ चुकाना अच्छा मानते हैं।

राहुकाल में क्या न करें

  • नया बिज़नेस, दुकान का उद्घाटन या कोई लॉन्च
  • एग्रीमेंट पर दस्तखत, घर, गाड़ी या सोना खरीदना
  • यात्रा की शुरुआत (अगर यात्रा टाल नहीं सकते तो लोग थोड़ा पहले या बाद में निकलते हैं)
  • सगाई, विवाह की रस्में, गृह प्रवेश
  • अगर चुनने का मौका हो तो इंटरव्यू या कोई ज़रूरी प्रस्ताव भेजना

राहुकाल में क्या कर सकते हैं

  • रोज़ का काम और पहले से शुरू किया गया कोई भी काम
  • राहु या दुर्गा की पूजा, कई मंदिरों में राहुकाल पूजा होती है
  • आराम, पढ़ाई और रोज़मर्रा के काम

राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त

कुछ दिनों में राहुकाल ठीक दोपहर वाले अभिजीत मुहूर्त पर पड़ जाता है। बुधवार को ऐसा अक्सर होता है। तब ज़्यादातर लोग उस दिन अभिजीत छोड़कर कोई अच्छा चौघड़िया चुनते हैं। यह पेज दोनों दिखाता है ताकि आप एक नज़र में देख सकें कि दोनों टकरा रहे हैं या नहीं।

क्या राहुकाल हर जगह एक जैसा है?

नहीं। यह आपके शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर है, इसलिए एक ही दिन चेन्नई और दिल्ली में 20 मिनट या ज़्यादा का फर्क हो सकता है, और विदेश के शहरों में बहुत ज़्यादा। ऊपर अपना शहर चुनें। हम आपका शहर याद रखते हैं, अगली बार पेज उसी के साथ खुलेगा।

राहुकाल सबके लिए एक आम नियम है। अगर जानना है कि आपकी कुंडली में राहु किस भाव में है और उसकी दशा आपके लिए क्या कहती है, तो Mygrah के AI से पूछें। वह घड़ी नहीं, आपकी कुंडली पढ़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आज राहुकाल कितने बजे है?+

आपके चुने शहर के लिए यह इस पेज पर सबसे ऊपर दिखता है। यह रोज़ बदलता है क्योंकि उस दिन के सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर करता है।

राहुकाल कितना लंबा होता है?+

दिन का आठवाँ हिस्सा। 12 घंटे के दिन में 90 मिनट। सर्दियों में 80 मिनट से कम और गर्मियों में 100 से ज़्यादा हो सकता है।

क्या रात में भी राहुकाल होता है?+

आम नियम में राहुकाल सिर्फ़ दिन में माना जाता है। कुछ परंपराएँ रात वाला भी मानती हैं, पर ज़्यादातर पंचांग और मंदिर दिन वाला ही मानते हैं।

क्या राहुकाल में यात्रा कर सकते हैं?+

कई लोग इसमें यात्रा शुरू नहीं करते। अगर समय नहीं बदल सकते तो लोग आमतौर पर थोड़ा पहले निकल जाते हैं या खत्म होने तक रुकते हैं।

राहुकाल और गुलिक काल में क्या फर्क है?+

दोनों दिन का आठवाँ हिस्सा हैं। राहुकाल में नई शुरुआत नहीं करते। गुलिक में भी शुभ काम टाले जाते हैं, पर कुछ परंपराओं में माना जाता है कि गुलिक में शुरू किया काम दोहराता है।

चेन्नई और दिल्ली में राहुकाल अलग क्यों है?+

क्योंकि सूर्योदय और सूर्यास्त अलग हैं। राहुकाल दिन का एक तय हिस्सा है, तो जब दिन अलग समय पर शुरू और खत्म होता है, यह भी खिसक जाता है।

रीडिंग केवल मार्गदर्शन और मनोरंजन के लिए हैं। ये चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं हैं।