पितृ दोष कैलकुलेटर
अपनी कुंडली में पितृ दोष जांचें। हम सूर्य और नौवें भाव के आसपास हर शास्त्रीय संकेत देखते हैं और साफ दिखाते हैं कि कौन सा लागू होता है।
यह कैसे काम करता है
नौवां भाव पिता, पूर्वज, धर्म और भाग्य का है, और सूर्य पिता का स्वाभाविक कारक है। जब इन्हें राहु, केतु या शनि छूते हैं तो पितृ दोष पढ़ा जाता है। हम आठ संकेत जांचते हैं:
- सूर्य के साथ राहु (ग्रहण योग) और नौवें में राहु, ये दो मज़बूत संकेत हैं।
- सूर्य के साथ केतु, सूर्य के साथ शनि, नौवें में केतु या शनि।
- नवमेश शनि, राहु या केतु के साथ या उनकी दृष्टि में।
- नवमेश 6, 8 या 12वें भाव में।
मज़बूत संकेत के 2 अंक, बाकी के 1। दो या ज़्यादा अंक मतलब दोष है, एक मतलब हल्का, शून्य मतलब नहीं। दृष्टि पराशरी नियम से (शनि 3/7/10, राहु-केतु 5/7/9)। भाव लग्न से पूरी राशि पद्धति में गिने जाते हैं, इसलिए सही जन्म समय ज़रूरी है।
पितृ दोष डर की नहीं, सम्मान और स्मरण की बात है। परंपरा में लोग पितृ पक्ष में श्राद्ध, ज़रूरतमंदों को भोजन और बड़ों की सेवा करते हैं।
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AI ज्योतिषी से पूछेंलोग ये पूछते हैं
पितृ दोष क्या है?+
पूर्वजों से जुड़े अधूरे कामों से जोड़ा जाने वाला कुंडली योग, जो सूर्य या नौवें भाव पर राहु, केतु या शनि के असर से पढ़ा जाता है।
क्या पितृ दोष आम है?+
कई कुंडलियों में कम से कम एक हल्का संकेत दिखता है। मज़बूत रूप (सूर्य-राहु या नौवें में राहु) कम आम है।
क्या सटीक जन्म समय चाहिए?+
नौवें भाव वाली जांच के लिए हां। सूर्य के साथ राहु/केतु/शनि वाली जांच के लिए सिर्फ तारीख काफी है।
पितृ दोष के लिए लोग क्या करते हैं?+
पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण, अमावस्या पर गाय, कौवे या ज़रूरतमंद को भोजन, और बड़ों का सम्मान।
रीडिंग केवल मार्गदर्शन और मनोरंजन के लिए हैं। ये चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं हैं।